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DROP OUT ? अपनी डिग्री पूरी करें

DROP OUT ? अपनी डिग्री पूरी करें

DROP OUT ? अपनी डिग्री पूरी करें. 

ATKT, CP, Backlog, FAIL, DROP:

हमारी शिक्षा पद्धित में पास या फेल मार्क्स के आधार पर decide होता है. कई बोर्ड या युनिवर्सिटी में 33 के नीचे फेल माना जाता है, तो कई जगह 40 व कई अन्य जगह 50. यह सीमा अलग अलग कोर्स के लिए अलग अलग हो सकती है. अधिकतर जगह इंजीनियरिंग में यह सीमा 40 व मास्टर लेवल पर 50 है. कभी कभी ग्रेस मार्क्स देकर एक या दो सब्जेक्ट पास कर दिए जाते हैं. ग्रेस मार्क्स के नियम भी अलग अलग जगह अलग अलग होते हैं. फेल विषय को कहीं कहीं ATKT या बैकलाग या CP (कैरी पेपर) भी कहा जाता है व अगले सेमेस्टर या एग्जाम में उसे पुनः लिख कर पास किया जा सकता है.

Criticism:

हमारे देश की शिक्षा पद्धित में अधिकतर एग्जाम या इवैल्यूएशन लिखित पेपर से होता है. प्रैक्टिकल या oral या skills पर एग्जाम कम होता है. यह सिस्टम की बड़ी कमी है. इस कमी की वजह से कई बार ऐसे विद्यार्थी फेल हो जाते हैं जिन्हें प्रैक्टिकली आता बहुत कुछ है, उनमे हुनर भी होता है पर लिखने में कमजोर होते हैं, बहुत जादा या बहुत अच्छा लिख नहीं पाते, और फेल हो जाते हैं.

Student Suffers:

  • कई बार स्टूडेंट अच्छे से पढ़ाई नहीं किया होता है इसलिए फेल हो जाता है.
  • कई बार स्टूडेंट पढ़ाई अच्छे से किया होता है पर अच्छे से लिख नहीं पता है इसलिए फेल हो जाता है.
  • कई बार स्टूडेंट पढ़ाई अच्छे से किया होता है, लिखता भी अच्छे से है, फिर भी फेल हो जाता है. (शायद examiner कुछ और चाहता था)
  • फेल हुआ स्टूडेंट re-check या re-valuation के लिए अप्लाई कर सकता है, पर 99% केस में फायदा नहीं होता.

What happens thereafter:

  • कुछ स्टूडेंट फेल होने के बाद, उस सब्जेक्ट में ध्यान लगा कर पढ़ते हैं और पास हो जाते हैं.
  • कई स्टूडेंट का इंटरेस्ट उस सब्जेक्ट से हटने लगता है जिस कारण वो पुनः फेल हो सकता है.
  • पुनः उसी सब्जेक्ट में फेल होने पर स्टूडेंट उस सब्जेक्ट को hate करने लगता है.
  • कई बार फेल होने पर उसे DROP लग जाता है.
  • इस सारी प्रक्रिया में स्टूडेंट मानसिक रूप से परेशान हो सकता है. स्टूडेंट बीमार हो सकता है. स्टूडेंट गलत रास्ते पर जा सकता है.

What should be done:

  • उस विषय पर जादा ध्यान दें, जादा काम करें, जादा पढ़ें.
  • सकारात्मक सोचें, आशावादी बनें, मेहनत और ईश्वर पर भरोसा रखें.
  • लिखने की प्रैक्टिस करें, जादा लिखना सीखें, अच्छा लिखना सीखें. (हमारे अधिकतर एग्जाम लिखित होते हैं इसीलिए)
  • जरुरत पड़े तो ट्यूशन लें, कोचिंग लें, ट्रेनिंग लें.
  • अपने प्रोफेसर से पूछें, वो मदद करेंगे.
  • अपने सीनियर स्टूडेंट से बात करें, उनसे notes लें, सलाह लें. वे इसी रास्ते से गुजरे हैं. उनके अनुभव काम आएंगे, उनसे गाइडेंस लें.
  • एग्जाम पैटर्न के हिसाब से पढ़ें.
  • पिछले पांच साल के पेपर्स solve करें.
  • पहला 50% lessons अच्छे से पढ़ें.
  • पूरे कॉन्फिडेंस से लिखें.
  • आप सफल होंगे.

I don’t want to carry from same college. I want to change:

  • हम यही सलाह देंगे कि जहाँ से पढ़ रहे हैं उसी कॉलेज से अपना कोर्स पूरा करें.
  • कई बार स्टूडेंट कई कारणों से कॉलेज या युनिवर्सिटी बदलना चाहते हैं.
  • इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे कॉलेज स्टूडेंट में तनाव या कॉलेज का खराब होना या स्टूडेंट का व्यक्तिगत कारण.

Now What:

  • अगर आपने स्कूल या कॉलेज या युनिवर्सिटी बदलना तय कर लिया है, तो पहले आप अपने कॉलेज को बता दीजिए कि आप कॉलेज छोड़ रहे हैं, और वहां से LC या TC ले लीजिए. यह जरुरी है.
  • दूसरे कॉलेज या युनिवर्सिटी में अप्लाई कीजिए.
  • दूसरे कॉलेज या युनिवर्सिटी से आप अपनी पसंद का कोर्स कर सकते हैं जैसे कि B.A, B.Com, B.Sc, BCA, BBA or अन्य विषय.
  • आप डिप्लोमा या इंजीनियरिंग भी कर सकते हैं.

We help you:

  • जी, हम आपकी मदद करेंगे.
  • हम आपके strength, weakness, interest, dreams, skills आदि को समझेंगे
  • आपको सही कोर्स, सही कॉलेज व सही युनिवर्सिटी चुनने में हेल्प करेंगे.
  • आपको एडमिशन व कोर्स पूरा करने में गाइड करेंगे.
  • Contact us by email or sms or whatsapp or phone or contact form.

Visit contact page and call us or fill Inquiry form. कांटेक्ट पेज पर जाइए, इन्क्वायरी फॉर्म भरिए या हमें फोन कीजिए.

 

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