Disaster Managemnt

Disaster Management आपदा प्रबंधन

भारत अपनी भौगोलिक दृष्टि से अन्नय भूगभाग क्षेत्र पर अलग अलग महत्व रखता है। कहीं ज्यादा गर्मी तो कहीं अधिक ठंड का क्षेत्र और इसी प्रकार कम वर्षा तो अधिक वर्षा का क्षेत्र भी पाया जाता है।

ऐसे मौसम से देश का प्रत्येक नागरिक प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है। यहाँ हाल ही मे उत्तराखंड मे भारी वर्षा की वजह से प्राकृतिक आपदा से भारी भरकम मानवीय और प्राकृतिक क्षति हुई थी। आपदा को अंग्रेजी मे Disaster कहते हैं।

आपदा दो प्रकार की होती हैं। एक प्राकृतिक और दूसरी मानव जनित आपदा होती है। प्राकृतिक आपदा में जैसे तादाद से ज्यादा भारी वर्षा से बाढ आ जाना और कम वर्ष से सूखा पड जाना, भूस्खलन, चक्रवात और सुनामी का आ जाना। पिछले वर्ष ही नेपाल मे तेज भूकंप के झटके से सबकुछ तबाह हो गया था। कश्मीर मे अत्यधिक बाढ से जनजीवन अस्तव्यस्त हो चुका था।

मानवीय आपदाओं मे जैसे अचानक से पुल टूट जाना, रेल दुर्घटना, हवाई तथा औद्योगिक दुर्घटना आदि का हो जाना।

हाल ही मे उत्तराखंड के जंगलो मे आग लग जाने की खबर सुनी गई। इससे पूर्व 1995 मे भारत सुनामी से भी जूझ चुका है। अनेक भूभाग मे सूखे की समस्या और आत्महत्या करते किसानों की खबर प्रमुखता से पढ़ी जा चुकी हैं।

इसी प्रकार पश्चिम बंगाल मे पुल का एकाएक ढह जाना और यूपी मे हाल ही मे रेल दुर्घटना भारी मानवीय क्षति का उदाहरण हैं। ऐसे तमाम सड़क दुर्घटना भी सुनी जा चुकी हैं।

इसलिये Disaster Management के क्षेत्र मे स्टूडेंट का कैरियर निर्माण की संभावना अधिक पाई जाती है। इस क्षेत्र मे अच्छी इनकम के साथ मानवीय सेवा करके आप राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तर दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपके मन मे मानव सेवा की रूचि होना आवश्यक है। अगर आपके अंदर मानव सेवा का भाव प्रबल है। स्वयं को राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक मानते हैं तो किसी भी उम्र मे, किसी भी समय आप राष्ट्र सेवा कर सकते हैं।

आप इस क्षेत्र मे एक अच्छे नेतृत्वकर्ता के साथ संयोजन और कार्मिक भूमिका निभा सकते हैं। वास्तविक आवश्यकता तो यह है कि प्रत्येक नागरिक को Disaster management में दक्ष होना चाहिए।

किंतु जो विद्यार्थी और बेरोजगार युवा रोजगार की दिशा मे प्रयासरत हैं। उन्हे इस क्षेत्र मे अपने गृह जिले से लेकर प्रदेश, देश और विश्व के किसी भी कोने मे कार्य करने का अवसर मिल सकता है। आप इस क्षेत्र मे वैज्ञानिक और विशेषज्ञों के साथ काम कर सकते हैं तथा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

जैसे कि अभी भी भूकंप की भविष्यवाणी पहले ही कर देने की चुनौती है। जिसके लिये वैज्ञानिक प्रयासरत है। साथ ही पशु पक्षियों पर भी अध्ययन किया जा रहा है। एक अध्ययन के मुताबिक यह पाया गया है कि पशु पक्षियों मे इतनी तीव्र सिक्स सेंस होती है कि भूकंप आने का अहसास पहले ही हो जाता है और वो सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच जाते हैं।

इसलिये इस क्षेत्र मे वैश्विक जगत पर अपार संभावनायें हैं। आप इस क्षेत्र मे सेवा भाव के साथ अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 12 वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स कुछ संस्थान के द्वारा कराया जाता है। साथ ही 10+2 के बाद स्नातक कोर्स भी उपलब्ध है। 

बीए, बीएससी और बीटेक आदि स्नातक कोर्स के बाद इस Disasters management की मास्टर डिग्री भी ले सकते हैं। 

कुछ संस्थान जहाँ से आप डिप्लोमा और डिग्री कोर्स कर सकते हैं.

1. स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी, सागर, MP
• आपदा प्रबंधन में एम.बी.ए.

2. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (www.ignou.ac.in)
• आपदा प्रबंधन प्रमाणपत्र
• स्नातकोत्तर आपदा प्रबंधन डिप्लोमा

3. सिक्किम मणिपाल स्वास्थ्य, चिकित्सा तथा प्रौद्योगिकी विज्ञान विश्वविद्यालय, गंगटोक (www.smu.ac.in)
• आपदा न्यूनीकरण में एमएस.सी। (दूरस्थ शिक्षा)

4. भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान, नई दिल्ली। (www.ecology. Edu)
• आपदा न्यूनीकरण में एमएस.सी। (दूरस्थ शिक्षा)

5. अन्नामलई विश्वविद्यालय, अन्नामलई नगर, तमिलनाडु (www.annamalai university.ac.in)
• आपदा प्रबंधन में एम.ए। (दूरस्थ शिक्षा)

6. पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (www.pu.ac.in)
• आपदा प्रबंधन में एम.ए.

कुल मिलाकर के जहाँ एक बेरोजगारी का डंका बज रहा है। वहीं अगर थोड़ी सी जागरूकता और जानकारी है तो रोजगार के अनेको द्वार खुले हुए हैं। जहाँ राष्ट्र सेवा और मानव सेवा के द्वारा आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर के अच्छे काम के साथ अच्छा धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


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काउंसलर : सौरभ द्विवेदी