खुशहाली आएगी ही

राम दरबार

चरित्र उत्पन्न होंगे. खुशहाली आएगी ही.

जिनके यहाँ ‘राम’ नहीं हैं, जिनके यहाँ ‘सीता’ नहीं हैं, उनसे आप चरित्र की अपेक्षा न करें.

हर घर में ‘राम’ हों. वनवास में भी साथ देने वाली ‘सीता’ हों. हर हाल में ‘राम’ के साथ चलने वाले ‘लक्ष्मण’ हों. अदभुत भात्र प्रेम वाले भरत हों, शत्रुहन हों. हर घर में चरित्र की बातें हों, ऐसी चरित्र की कथा कहानी सुनी जाए व सुनाई जाए. खासकर बच्चों को सुनाई जाए. चरित्र उत्पन्न होंगे.

कितना भी लंबा बनवास होगा जीवन में, कट जाएगा. विजय मिलेगी ही. खुशहाली आएगी ही.